
अध्याय 1: अधूरी यादों का साया
रात के ठीक 3 बजकर 17 मिनट हुए थे।
आसमान में बादल छाए हुए थे और हवा में एक अजीब-सी ठंडक घुली हुई थी। भोपाल शहर के एक शांत इलाके में बने पुराने मकान के कमरे में आरव अचानक चीखते हुए उठ बैठा।
उसकी सांसें तेज़ चल रही थीं, माथे पर पसीना था और दिल जैसे सीने से बाहर निकलने को बेचैन था।
“नहीं… मत मारो… मैं तुम्हारा दोस्त हूँ…”
वह बड़बड़ाया।
कमरे में चारों तरफ़ सन्नाटा था। सिर्फ़ दीवार घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही थी।
आरव ने कांपते हाथों से पानी का गिलास उठाया और एक ही सांस में पी गया।
यह कोई पहला सपना नहीं था।
पिछले दो महीनों से वही सपना उसे हर तीसरी-चौथी रात परेशान कर रहा था।
एक सुनसान सड़क…
घना अंधेरा…
और किसी का चेहरा जो उसे मार रहा था।
लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि उसे उस आदमी की आँखें याद थीं।
वे आँखें… जैसे वह आदमी उसे पहचानता था।
आरव ने सिर पकड़ लिया।
“ये सब क्या हो रहा है मेरे साथ?”
उसी समय उसके फोन की स्क्रीन चमकी।
03:18 AM
और अचानक फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।
मैसेज पढ़ते ही उसके हाथ कांप गए।
मैसेज में सिर्फ़ चार शब्द लिखे थे —
“तुम वापस आ गए हो।”
आरव का गला सूख गया।
उसने तुरंत नंबर पर कॉल किया।
लेकिन कॉल लगते ही फोन से सिर्फ़ एक अजीब-सी आवाज़ आई — जैसे हवा किसी पुराने कुएँ के अंदर से गुजर रही हो।
और फिर कॉल कट गई।
कमरे की लाइट अचानक झपकने लगी।
आरव का दिल तेजी से धड़क रहा था।
उसे अचानक अपने दिमाग में एक झलक दिखाई दी।
एक कार…
बारिश…
और एक आदमी जो उसके सामने खड़ा था।
उस आदमी के हाथ में चाकू था।
और वह आदमी धीरे-धीरे मुस्कुरा रहा था।
“माफ करना दोस्त…”
उस आवाज़ के साथ ही चाकू उसकी छाती में उतर गया।
आरव अचानक फिर चीख पड़ा।
“नहीं!!!”
उसी समय दरवाज़ा खुला।
उसकी छोटी बहन नैना घबराई हुई अंदर आई।
“भैया क्या हुआ?”
आरव कुछ सेकंड तक कुछ बोल ही नहीं पाया।
फिर उसने धीरे से कहा—
“नैना… अगर मैं तुमसे कुछ अजीब बात कहूँ तो क्या तुम विश्वास करोगी?”
नैना ने उसकी तरफ देखा।
“पहले बताओ तो सही।”
आरव ने गहरी सांस ली।
“मुझे लगता है… मैं ये जिंदगी पहली बार नहीं जी रहा।”
कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया।
नैना हल्का-सा हँस दी।
“भैया आप फिर से अपने थ्रिलर मूड में आ गए क्या?”
लेकिन आरव की आँखों में डर था।
सचमुच का डर।
“मैं मज़ाक नहीं कर रहा।”
उसने धीरे-धीरे कहा —
“मुझे लगता है… मुझे मेरी मौत याद आने लगी है।”
नैना का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।
“कौन-सी मौत?”
आरव ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा —
“मेरे पिछले जन्म की।”
कमरे में हवा अचानक ठंडी हो गई।
और उसी समय फोन फिर से बज उठा।
इस बार स्क्रीन पर जो नाम दिखा… उसे देखकर आरव की सांस रुक गई।
स्क्रीन पर लिखा था —
“विक्रम कॉलिंग…”
आरव के दिमाग में अचानक एक आवाज़ गूंज उठी —
“तुम्हें याद आ ही गया… आखिरकार।”
और उसी पल आरव को समझ आ गया।
जिस आदमी ने उसे मारा था…
वह कोई दुश्मन नहीं था।
वह उसका सबसे अच्छा दोस्त था।
और शायद…
वह अभी भी जिंदा था।