Part 4 : सच का दरवाज़ा
रात के 2 बज रहे थे।
आरव अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ा था। बाहर हल्की बारिश हो रही थी, और हर गिरती बूंद उसे मीरा की याद दिला रही थी।
तीन दिन हो चुके थे।
तीन दिन… जब से मीरा अचानक उसकी जिंदगी से गायब हो गई थी।
ना कोई कॉल।
ना कोई मैसेज।
ना कोई निशान।
लेकिन आज… कुछ अलग था।
आज उसे वो डायरी मिली थी।
📖 वो डायरी, जिसमें छुपा था एक राज
डायरी वही थी, जो मीरा हमेशा अपने बैग में रखती थी।
वही डायरी… जिसे वो किसी को छूने भी नहीं देती थी।
आरव के हाथ कांप रहे थे।
उसने धीरे से पहला पेज खोला।
पहले पेज पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी—
“अगर तुम ये पढ़ रहे हो… तो इसका मतलब है, मैं अब तुम्हारे पास नहीं हूँ।”
आरव का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
उसने आगे पढ़ा—
“आरव, मैंने तुमसे झूठ बोला था… लेकिन वो झूठ तुम्हें बचाने के लिए था।”
आरव की आंखों में आंसू आ गए।
“मुझसे… झूठ?” उसने धीरे से खुद से कहा।
🕰️ अतीत का सच
डायरी के अगले पन्नों में मीरा ने सब कुछ लिखा था।
तीन साल पहले…
मीरा एक हादसे का शिकार हुई थी।
एक कार एक्सीडेंट।
उस एक्सीडेंट में एक लड़के की मौत हो गई थी।
और वो लड़का…
आरव का छोटा भाई था।
आरव को कभी पता नहीं चला कि उस एक्सीडेंट में मीरा शामिल थी।
क्योंकि मीरा वहां से भाग गई थी।
डर के कारण।
गिल्ट के कारण।
और जब किस्मत ने उन्हें फिर से मिलाया…
मीरा ने सच छुपा लिया।
क्योंकि वो आरव को खोना नहीं चाहती थी।
💔 प्यार… या सजा?
डायरी में आगे लिखा था—
“मैं हर दिन मरती रही हूँ, आरव… क्योंकि मैं तुम्हें सच नहीं बता पाई।”
“मैं तुम्हारे साथ हर पल जीना चाहती थी… लेकिन मुझे पता था, मैं तुम्हारी खुशी की हकदार नहीं हूँ।”
आरव की आंखों से आंसू गिरने लगे।
उसे समझ नहीं आ रहा था…
वो मीरा से नफरत करे…
या उससे और ज्यादा प्यार करे।
📞 अचानक आया एक कॉल
तभी आरव का फोन बजा।
Unknown Number.
उसने कॉल उठाया।
“हेलो?”
दूसरी तरफ से धीमी आवाज आई—
“अगर तुम मीरा को बचाना चाहते हो… तो कल सुबह 6 बजे, पुराने रेलवे स्टेशन आना।”
आरव का दिल रुक गया।
“कौन हो तुम? मीरा कहां है?” उसने चिल्लाकर पूछा।
लेकिन कॉल कट चुकी थी।
🚉 अगली सुबह
सुबह 6 बजे।
पुराना रेलवे स्टेशन।
वो जगह अब सुनसान थी।
कोई नहीं आता था वहां।
आरव वहां पहुंचा।
उसका दिल जोर से धड़क रहा था।
तभी उसने देखा…
दूर… एक लड़की खड़ी थी।
सफेद ड्रेस में।
बारिश में भीगी हुई।
वो मीरा थी।
😨 लेकिन… कुछ अलग था
मीरा उसे देख रही थी।
लेकिन उसकी आंखों में वो प्यार नहीं था…
वो डर था।
और दर्द।
“मीरा!” आरव उसकी तरफ दौड़ा।
लेकिन तभी…
पीछे से किसी ने कहा—
“रुको।”
आरव ने पीछे मुड़कर देखा।
एक आदमी खड़ा था।
उसकी आंखों में गुस्सा था।
उसने कहा—
“तुम्हें सच जानने का हक है।”
आरव का दिल धड़कने लगा।
“कौन सा सच?”
आदमी मुस्कुराया।
और बोला—
“मीरा ने सिर्फ एक्सीडेंट नहीं किया था…”
“वो एक्सीडेंट… जानबूझकर किया गया था।”
आरव के पैरों तले जमीन खिसक गई।
उसने मीरा की तरफ देखा।
मीरा रो रही थी।
और उसने धीरे से कहा—
“हाँ… ये सच है।”
💥 वो सच जिसने सब कुछ बदल दिया
आरव की दुनिया टूट चुकी थी।
जिस लड़की से वो सबसे ज्यादा प्यार करता था…
वो उसके भाई की मौत की वजह थी।
लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी।
क्योंकि असली सच… अभी बाकी था।