
PART 1: वह लड़की जो मेरी किस्मत में नहीं थी
रात के 11:40 बज रहे थे।
मुंबई का दादर रेलवे स्टेशन हमेशा की तरह भीड़ से भरा हुआ था।
लोग भाग रहे थे।
कोई घर जाने के लिए।
कोई किसी से मिलने के लिए।
लेकिन आरव…
वह बस खड़ा था।
अकेला।
जैसे हमेशा से था।
उसकी जिंदगी एक सीधी लाइन जैसी थी।
कोई excitement नहीं।
कोई प्यार नहीं।
कोई इंतज़ार नहीं।
लेकिन…
उस रात सब बदलने वाला था।
एक अजीब मुलाकात
Platform नंबर 4 पर खड़े-खड़े उसकी नजर अचानक उस पर पड़ी।
एक लड़की।
सफेद dress में।
खुले बाल।
और आंखों में एक अजीब सा दर्द।
वह अकेली खड़ी थी।
जैसे किसी का इंतज़ार कर रही हो।
या…
जैसे किसी को हमेशा के लिए अलविदा कहने आई हो।
आरव की नजरें उस पर टिक गईं।
उसे खुद नहीं पता था क्यों।
लेकिन उसके दिल ने पहली बार किसी के लिए तेज़ धड़कना शुरू किया।
तभी…
लड़की ने उसकी तरफ देखा।
उनकी आंखें मिलीं।
और उसी पल…
कुछ बदल गया।
वह पहली बात
लड़की धीरे-धीरे उसकी तरफ आई।
“Excuse me…”
उसकी आवाज बहुत धीमी थी।
“क्या यह train पुणे जाएगी?”
आरव ने खुद को संभाला।
“हाँ… जाएगी।”
लड़की ने हल्की सी मुस्कान दी।
“Thank you।”
वह जाने लगी।
लेकिन फिर अचानक रुकी।
और पूछा—
“क्या आप कभी किसी ऐसे इंसान से मिले हैं…”
“जिसे देखते ही लगे कि वह आपकी किस्मत है?”
आरव shock हो गया।
यह सवाल अजीब था।
लेकिन…
सच था।
उसने धीरे से कहा—
“शायद… अभी मिला हूँ।”
लड़की मुस्कुराई।
लेकिन उसकी मुस्कान में दर्द था।
वह नाम जो मेरी जिंदगी बन गया
“मेरा नाम काव्या है।”
आरव ने जवाब दिया—
“मैं आरव हूँ।”
कुछ seconds तक silence रहा।
फिर train आ गई।
काव्या train में चढ़ने लगी।
लेकिन चढ़ने से पहले उसने आरव की तरफ देखा।
और कहा—
“अगर किस्मत ने चाहा…”
“तो हम फिर मिलेंगे।”
और train चल पड़ी।
आरव बस उसे जाते हुए देखता रहा।
उसे नहीं पता था…
कि यह मुलाकात उसकी जिंदगी की सबसे खूबसूरत…
और सबसे दर्दनाक कहानी की शुरुआत थी।
उस रात के बाद
उस रात के बाद…
आरव बदल गया।
वह रोज़ उसी platform पर जाने लगा।
उम्मीद में।
कि शायद वह फिर मिले।
लेकिन…
वह कभी नहीं आई।
दिन बीत गए।
महीने बीत गए।
लेकिन उसका इंतज़ार खत्म नहीं हुआ।
उसे खुद समझ नहीं आ रहा था—
कि एक अजनबी लड़की उसके दिल में इतनी गहराई से कैसे बस गई।
लेकिन…
कहानी अभी शुरू हुई थी।
और सबसे बड़ा सच अभी बाकी था।