अधूरी मोहब्बत का आख़िरी ख़त

PART 9: असली कातिल

कमरे में फैला हुआ अंधेरा अब और भी भारी हो चुका था।

दीवार पर तीन shadows साफ दिखाई दे रहे थे।

एक सिया का।
एक रोहन का।
और…

एक तीसरा shadow…

जो धीरे-धीरे…

आरव के shadow से मिल रहा था।

आरव का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

उसकी सांसें अनियंत्रित हो गईं।

“ये… ये क्या है…” उसकी आवाज़ काँप रही थी।

सिया की आँखें सीधे उसकी आँखों में देख रही थीं।

“याद करो, आरव…”

“उस रात क्या हुआ था…”


अचानक—

आरव के दिमाग में फिर से वही memory शुरू हो गई।

पुराना रेलवे स्टेशन…

बारिश…

सिया…

रोहन…

और…

खुद वो।


Memory में—

रोहन ने सिया को पकड़ रखा था।

“तुम मेरी हो!” रोहन चिल्लाया।

सिया रो रही थी—

“नहीं! मैं तुमसे प्यार नहीं करती!”

तभी—

आरव वहाँ पहुँचा।

“रोहन! उसे छोड़ दो!”

रोहन ने गुस्से में कहा—

“तुम बीच में मत आओ!”

दोनों के बीच लड़ाई शुरू हो गई।

सिया डरकर पीछे हटने लगी।


तभी—

कुछ unexpected हुआ।

रोहन ने सिया को नहीं धक्का दिया।

उसने सिर्फ उसका हाथ छोड़ा।

सिया खुद पीछे हटते हुए balance खो बैठी।

और गिरने लगी।

उसी पल—

आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।

उसकी उंगलियाँ सिया की उंगलियों से जुड़ गईं।

सिया की आँखों में उम्मीद थी।

“आरव… मुझे मत छोड़ना…”


Present में खड़ा आरव जोर-जोर से सांस लेने लगा।

उसे सब याद आने लगा।

हर detail…

हर feeling…


Memory में—

आरव ने सिया का हाथ कसकर पकड़ रखा था।

वो उसे ऊपर खींच सकता था।

वो उसे बचा सकता था।

लेकिन…

उसी पल…

उसके दिमाग में एक खतरनाक ख्याल आया।

एक ख्याल…

जो उसने कभी किसी को नहीं बताया।


उसने सोचा—

“अगर सिया बच गई…”

“तो रोहन कभी हमारा पीछा नहीं छोड़ेगा…”

“वो हमारी जिंदगी बर्बाद कर देगा…”

उसके दिल में डर था।

गुस्सा था।

और…

एक पल के लिए…

उसका प्यार कमजोर पड़ गया।


सिया चिल्लाई—

“आरव! प्लीज़!”

उसकी उंगलियाँ फिसल रही थीं।

आरव उसे बचा सकता था।

बस एक pull…

बस एक कोशिश…

लेकिन…

उसके हाथ ढीले पड़ गए।

और…

उसने…

जानबूझकर… उसका हाथ छोड़ दिया।


Present में—

आरव जमीन पर गिर पड़ा।

उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।

“नहीं…”

“नहीं… ये सच नहीं है…”

लेकिन…

उसका दिल सच जान चुका था।


Memory में—

सिया नीचे गिर गई।

उसकी आँखों में shock था।

दर्द था।

और…

एक सवाल था।

“तुमने… मुझे क्यों छोड़ा…?”

और फिर—

ट्रेन आ गई।

सब कुछ खत्म हो गया।


Present में—

आरव जोर-जोर से रोने लगा।

“मैंने… उसे मार दिया…”

उसकी आवाज़ टूट गई।

“मैं ही उसका killer हूँ…”


सिया उसके सामने खड़ी थी।

उसकी आँखों में आँसू थे।

“हाँ, आरव…”

“रोहन ने मुझे hurt किया…”

“लेकिन…”

उसकी आवाज़ भारी हो गई—

“आखिरी फैसला तुम्हारा था…”


रोहन हवा में जकड़ा हुआ चिल्ला रहा था—

“नहीं! ये झूठ है!”

लेकिन…

अब सच सामने आ चुका था।


आरव को अब समझ आया—

उसका दिमाग इस guilt को सह नहीं पाया।

इसलिए उसने खुद को बचाने के लिए…

अपनी ही memory erase कर दी।

उसने खुद को convince कर लिया…

कि वो innocent है।

कि killer कोई और है।


लेकिन…

सच हमेशा वापस आता है।


सिया धीरे-धीरे उसके करीब आई।

उसने उसके चेहरे को देखा।

“मैं तुमसे प्यार करती थी, आरव…”

“और आज भी करती हूँ…”

उसकी आँखों से आँसू गिरने लगे।

“लेकिन तुमने मुझे धोखा दिया…”


आरव रोते हुए बोला—

“मुझे माफ कर दो…”

“प्लीज़…”

“मैं डर गया था…”

“मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता था…”


सिया ने धीरे से कहा—

“लेकिन तुमने मुझे खो दिया…”


अचानक—

कमरे में हवा तेज़ हो गई।

सब कुछ हिलने लगा।

सिया की आँखें बदलने लगीं।

अब उनमें प्यार नहीं था।

अब उनमें…

फैसला था।


उसने धीरे से कहा—

“अब समय आ गया है…”

“तुम्हारे punishment का…”


आरव की सांस रुक गई।

उसने सिया की आँखों में देखा।

और समझ गया—

अब जो होने वाला है…

वो उसकी जिंदगी का आखिरी सच होगा।


PART 9 END

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