PART 8: अधूरी यादें
कमरा पूरी तरह अंधेरे में डूब चुका था।
ना कोई आवाज़…
ना कोई हलचल…
सिर्फ आरव की तेज़ धड़कती हुई साँसें।
रोहन हवा में जकड़ा हुआ था, जैसे कोई invisible शक्ति उसे पकड़कर रोक रही हो।
और सिया…
वो वहीं खड़ी थी।
उसकी आँखें अब आरव पर टिकी हुई थीं।
लेकिन इस बार…
उसकी आँखों में गुस्सा नहीं था।
सिर्फ एक गहरा दर्द था।
“आरव…” उसकी आवाज़ धीमी और भारी थी।
“अब समय आ गया है…”
“किस बात का…?” आरव की आवाज़ काँप रही थी।
सिया धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ी।
“सच जानने का…”
अचानक…
आरव के सिर में तेज़ दर्द शुरू हुआ।
उसने अपना सिर पकड़ लिया।
“आह…!”
उसकी आँखों के सामने सब कुछ धुंधला होने लगा।
और फिर…
उसे कुछ दिखने लगा।
एक याद…
जो उसकी नहीं थी…
या शायद…
थी।
तीन साल पहले…
वही पुराना रेलवे स्टेशन।
रात का समय।
बारिश हो रही थी।
और वहाँ…
सिया खड़ी थी।
वो रो रही थी।
“प्लीज़ मुझे जाने दो…” सिया की आवाज़ काँप रही थी।
उसके सामने…
रोहन खड़ा था।
उसकी आँखों में पागलपन था।
“मैं तुम्हें किसी और का नहीं होने दूँगा!”
सिया पीछे हटने लगी।
“रोहन… ये प्यार नहीं है…”
“ये पागलपन है…”
तभी—
वहाँ एक और इंसान आया।
एक तीसरा व्यक्ति।
वो…
आरव था।
Present में खड़ा आरव shock में ये सब देख रहा था।
“ये… ये कैसे possible है…”
उसने खुद को उस memory में देखा।
वो खुद वहाँ था।
तीन साल पहले।
लेकिन…
उसे ये याद क्यों नहीं था?
Memory में—
आरव दौड़ते हुए आया।
“सिया!”
सिया ने उसे देखा।
उसकी आँखों में उम्मीद आ गई।
“आरव! प्लीज़ मुझे बचाओ!”
रोहन गुस्से में चिल्लाया—
“तुम यहाँ क्या कर रहे हो!”
आरव ने गुस्से में कहा—
“उसे छोड़ दो!”
तीनों के बीच बहस शुरू हो गई।
रोहन ने सिया का हाथ पकड़ रखा था।
सिया छूटने की कोशिश कर रही थी।
“प्लीज़… मुझे जाने दो…”
अचानक—
रोहन ने उसे जोर से धक्का दिया।
सिया पीछे की तरफ गिरने लगी।
“नहीं!” आरव चिल्लाया।
उसने सिया को पकड़ने की कोशिश की।
लेकिन—
उसका हाथ फिसल गया।
और…
सिया पटरी पर गिर गई।
उसी समय…
एक तेज़ ट्रेन आ रही थी।
सिया की आँखें आखिरी बार आरव से मिलीं।
और फिर—
सब कुछ खत्म हो गया।
Present में—
आरव जमीन पर गिर गया।
उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।
“नहीं…”
“ये… ये सच नहीं है…”
उसका पूरा शरीर काँप रहा था।
“मैं वहाँ था…”
“मैं उसे बचा सकता था…”
सिया उसके सामने खड़ी थी।
उसकी आँखों में आँसू थे।
“तुम वहाँ थे, आरव…”
“लेकिन तुमने खुद को ये सच कभी याद नहीं करने दिया…”
“तुम्हारा दिमाग… उस दर्द को सह नहीं पाया…”
“इसलिए तुम सब कुछ भूल गए…”
आरव को अब सब याद आ रहा था।
उस रात की हर बात।
उसकी हर कोशिश।
उसकी हर नाकामी।
“मैं… उसे बचा नहीं पाया…”
उसकी आवाज़ टूट गई।
“मैंने उसे मरने दिया…”
सिया धीरे से उसके सामने बैठ गई।
“नहीं…”
“ये तुम्हारी गलती नहीं थी…”
“तुमने मुझे बचाने की पूरी कोशिश की थी…”
“लेकिन…”
उसकी आवाज़ धीमी हो गई।
“कहानी अभी पूरी नहीं हुई है…”
आरव ने उसकी तरफ देखा।
“क्या मतलब?”
सिया की आँखों में एक अजीब सा भाव था।
जैसे वो कुछ ऐसा बताने वाली थी…
जो सब कुछ बदल देगा।
उसने धीरे से कहा—
“मेरी मौत accident नहीं थी…”
“लेकिन… killer भी सिर्फ रोहन नहीं था…”
आरव की सांस रुक गई।
“तो… और कौन था?”
सिया ने उसकी आँखों में देखा।
और धीरे से कहा—
“उस रात… एक और इंसान था…”
अचानक—
कमरे की दीवार पर एक shadow दिखाई दी।
एक तीसरा shadow।
जो रोहन का नहीं था।
जो सिया का नहीं था।
और…
जो धीरे-धीरे…
आरव के shadow से मिल रहा था।
आरव की आँखें डर से फैल गईं।
“न… नहीं…”
उसका दिल जोर से धड़कने लगा।
सिया की आवाज़ गूंज उठी—
“अब तुम्हें आखिरी सच याद करना होगा…”
और उसी पल…
आरव को अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा सच याद आने लगा।
एक ऐसा सच…
जिसे जानकर…
उसकी पूरी दुनिया खत्म होने वाली थी।
PART 8 END