अधूरी मोहब्बत का आख़िरी ख़त

PART 6: सिया की डायरी

रात के 3 बजे थे।

आरव अपने कमरे में अकेला बैठा था।

कमरे की light बंद थी।
सिर्फ table lamp की हल्की पीली रोशनी जल रही थी।

उसके दिमाग में बार-बार वही बातें घूम रही थीं—

“मैं अब ज़िंदा नहीं हूँ…”
“मेरी आत्मा यहाँ फंसी हुई है…”
“सिया की diary ढूंढो…”

उसने अपना चेहरा अपने हाथों में छुपा लिया।

उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।

“ये सब क्या हो रहा है…” उसने खुद से कहा।

“क्या मैं पागल हो रहा हूँ…?”

लेकिन उसके दिल को पता था—

ये सब सच था।

सिया सच में वापस आई थी।

और वो उसे कुछ बताना चाहती थी।


अगली सुबह—

आरव सीधे सिया के पुराने घर गया।

वही घर… जहाँ वो पहले रहता थी।

दरवाज़ा अब भी बंद था।

लेकिन इस बार…

दरवाज़ा locked नहीं था।

आरव ने धीरे से दरवाज़ा खोला।

चररररर…

दरवाज़ा खोलते ही धूल की smell आई।

ऐसा लग रहा था जैसे यहाँ महीनों से कोई नहीं आया।

कमरे में सब कुछ वैसा ही था—

Table…
Bed…
Books…

जैसे सिया अभी भी यहाँ रहती हो।

आरव धीरे-धीरे कमरे में अंदर गया।

उसका दिल तेज़ धड़क रहा था।

उसे ऐसा लग रहा था जैसे सिया अभी पीछे से आकर उसे बुलाएगी—

“आरव…”

लेकिन…

वहाँ सिर्फ खामोशी थी।


अचानक—

उसकी नजर table पर रखी एक photo frame पर गई।

वो photo…

आरव और सिया की थी।

दोनों हँस रहे थे।

आरव के हाथ काँपने लगे।

“तुमने… ये photo संभालकर रखी…” उसने धीरे से कहा।

उसकी आँखें भर आईं।


तभी—

उसे याद आया—

Diary.

उसने पूरे कमरे में diary ढूंढना शुरू किया।

Table…
Drawer…
Almirah…

लेकिन कहीं diary नहीं मिली।

उसका दिल टूटने लगा।

“क्या diary सच में exist करती है…?”

तभी—

उसे bed के नीचे कुछ दिखा।

एक छोटा सा box।

उसने box बाहर निकाला।

उसका दिल और तेज़ धड़कने लगा।

उसने box खोला।

और…

अंदर एक diary थी।

नीले रंग की diary।

जिस पर लिखा था—

“SIA”

आरव की सांस रुक गई।

“ये… यही है…”


उसने trembling hands से diary खोली।

पहले page पर लिखा था—

“अगर कोई ये diary पढ़ रहा है… तो इसका मतलब है… मैं अब इस दुनिया में नहीं हूँ।”

आरव की आँखों से आँसू गिरने लगे।

उसने आगे पढ़ा—


Diary Entry – 12 June

“आज वो फिर आया था…”

“वो कह रहा था कि वो मुझसे प्यार करता है…”

“लेकिन उसकी आँखों में प्यार नहीं… पागलपन था…”

“मुझे डर लग रहा है…”


Diary Entry – 18 June

“वो मेरा पीछा करता है…”

“वो हर जगह होता है…”

“मुझे लगता है… वो मुझे कभी नहीं छोड़ेगा…”


Diary Entry – 25 June

“आज मैंने पहली बार मौत को करीब से महसूस किया…”

“उसने कहा… अगर मैं उसकी नहीं हुई… तो वो मुझे किसी और की भी नहीं होने देगा…”


आरव के हाथ काँपने लगे।

उसका गुस्सा बढ़ता जा रहा था।


फिर…

उसने आखिरी page खोला।

उस page पर लिखा था—

Diary Entry – Last

“अगर तुम ये पढ़ रहे हो, आरव…”

“तो इसका मतलब है… तुम सच के करीब पहुँच गए हो…”

आरव का दिल रुक गया।

“उसने… मेरा नाम लिखा…”

उसने आगे पढ़ा—

“मैं जानती हूँ… तुम मुझसे प्यार करते हो…”

“और मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ…”

“लेकिन एक सच्चाई है… जो मैंने तुमसे छुपाई…”

“वो आदमी… जिसने मुझे मारा…”

“वो कोई stranger नहीं था…”

आरव की सांसें रुक गईं।

उसने आगे पढ़ा—

“वो… तुम्हारे बहुत करीब है…”


आरव shock में freeze हो गया।

“मेरे… करीब?”

उसका दिमाग काम करना बंद कर चुका था।

उसने diary का आखिरी sentence पढ़ा—

“उसका नाम है…”

लेकिन—

Name के ऊपर किसी ने ink से cross कर दिया था।

Name जानबूझकर मिटाया गया था।


आरव का दिल जोर से धड़कने लगा।

किसी ने जानबूझकर उस नाम को छुपाया था।

क्यों?

कौन था वो?

और…

उसे कैसे पता था कि आरव diary पढ़ेगा?


तभी—

अचानक…

पीछे से दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई।

धड़ाम!

आरव तुरंत पीछे मुड़ा।

उसका दिल जोर से धड़कने लगा।

कमरे में अब वो अकेला नहीं था।

किसी की presence साफ महसूस हो रही थी।

और फिर…

एक आवाज़ आई—

“तुम्हें ये diary नहीं पढ़नी चाहिए थी…”

आरव की सांस रुक गई।

वो धीरे-धीरे पीछे मुड़ा।

और जो उसने देखा—

उसे देखकर उसकी दुनिया हमेशा के लिए बदल गई।


PART 6 END

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