PART 5: सिया की सच्चाई
पुराने रेलवे स्टेशन की टूटी हुई दीवारों के बीच…
ठंडी हवा चल रही थी।
और उस हवा के साथ…
एक आवाज़ फिर से आई—
“आरव…”
आरव का पूरा शरीर सुन्न हो गया।
वो धीरे-धीरे पीछे मुड़ा।
उसकी सांसें रुक गईं।
वहाँ…
फिर से सिया खड़ी थी।
लेकिन इस बार… कुछ अलग था।
उसका चेहरा पीला था…
उसकी आँखों के नीचे काले निशान थे…
और सबसे डरावनी बात—
उसके पैर ज़मीन को छू नहीं रहे थे।
आरव की आँखें डर से फैल गईं।
“स… सिया…?”
सिया बस उसे देख रही थी।
उसकी आँखों में दर्द था।
और… एक अजीब सी शांति।
“तुम… यहाँ क्यों आए…” उसने धीमी आवाज़ में पूछा।
आरव की आँखों से आँसू बहने लगे।
“क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूँ!”
उसकी आवाज़ पूरे स्टेशन में गूंज गई।
“तुम अचानक चली गई… तुमने मुझे कुछ नहीं बताया…”
“मैं पागलों की तरह तुम्हें ढूंढता रहा…”
“तुम ज़िंदा हो ना…? बोलो सिया!”
सिया की आँखों में आँसू आ गए।
लेकिन उसने जवाब नहीं दिया।
कुछ सेकंड की खामोशी के बाद…
उसने धीरे से कहा—
“आरव… मैं अब ज़िंदा नहीं हूँ।”
आरव का दिल रुक गया।
“नहीं… ये झूठ है…”
“मैं तुम्हें देख सकता हूँ… तुम मेरे सामने हो…”
सिया ने धीरे से सिर हिलाया।
“जो तुम देख रहे हो… वो सिर्फ मेरा शरीर नहीं है…”
“वो… मेरी अधूरी आत्मा है…”
आरव की आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे।
“नहीं… ऐसा नहीं हो सकता…”
सिया ने धीरे-धीरे अपनी कहानी बतानी शुरू की—
“तीन साल पहले…”
“मैं भी एक normal लड़की थी…”
“मेरे सपने थे… मेरी जिंदगी थी…”
“लेकिन एक दिन…”
उसकी आवाज़ काँप गई।
“एक आदमी मेरी जिंदगी में आया…”
आरव को वही आदमी याद आया।
“वो मुझसे obsessed था…”
“वो मुझे अपना बनाना चाहता था…”
“लेकिन… मैं उससे प्यार नहीं करती थी…”
“मैंने उसे मना कर दिया…”
सिया की आँखों से आँसू गिरने लगे।
“और फिर…”
“उसने मुझे मार दिया…”
आरव की सांस रुक गई।
“उसने… मुझे इस स्टेशन पर धक्का दे दिया…”
“और सबको लगा… ये एक accident था…”
आरव का दिमाग सुन्न हो गया।
“तो… वो आदमी…”
सिया ने सिर हिलाया।
“वो अभी भी ज़िंदा है…”
“और वो अभी भी मुझे जाने नहीं दे रहा…”
“मेरी आत्मा… यहाँ फंसी हुई है…”
आरव ने गुस्से में कहा—
“मैं उसे छोड़ूँगा नहीं!”
“मैं उसे सज़ा दिलाऊँगा!”
सिया ने तुरंत कहा—
“नहीं!”
उसकी आवाज़ अचानक तेज़ हो गई।
“तुम नहीं समझते…”
“वो बहुत खतरनाक है…”
“अगर तुमने सच जानने की कोशिश की…”
“तो वो तुम्हें भी मार देगा…”
आरव ने उसकी आँखों में देखा।
“मुझे परवाह नहीं…”
“मैं तुम्हें ऐसे नहीं छोड़ सकता…”
सिया की आँखों में प्यार साफ दिख रहा था।
“तुम अलग हो, आरव…”
“तुमने मुझसे सच्चा प्यार किया…”
“और यही वजह है कि मैं वापस आई…”
आरव ने धीरे से पूछा—
“क्या तुम… हमेशा के लिए मेरे साथ रह सकती हो?”
सिया की आँखों में दर्द भर गया।
“नहीं…”
“मेरा समय खत्म हो रहा है…”
“मैं ज्यादा देर तक इस दुनिया में नहीं रह सकती…”
आरव का दिल टूट गया।
“नहीं… ऐसा मत कहो…”
तभी—
अचानक…
पीछे से वही आदमी फिर से दिखाई दिया।
उसकी आँखों में गुस्सा था।
“मैंने तुम्हें चेतावनी दी थी…”
आरव तुरंत उसके सामने खड़ा हो गया।
“तुमने सिया को मारा!”
आदमी हँस पड़ा।
“हाँ…”
“और अब… तुम्हारी बारी है…”
आरव का दिल जोर से धड़कने लगा।
सिया चिल्लाई—
“नहीं!”
अचानक—
स्टेशन की सारी lights flicker करने लगीं।
हवा तेज़ हो गई।
और सिया की आँखें अचानक बदल गईं।
अब उनमें डर नहीं था…
अब उनमें गुस्सा था।
उसने उस आदमी की तरफ देखा—
और अचानक—
वो आदमी हवा में उठ गया।
जैसे कोई invisible force उसे पकड़ रही हो।
वो आदमी चिल्लाने लगा—
“नहीं! ये possible नहीं है!”
सिया की आवाज़ गूंज उठी—
“तुमने मेरी जिंदगी छीनी थी…”
“अब तुम्हारी बारी है…”
और अचानक—
वो आदमी जोर से ज़मीन पर गिरा।
और बेहोश हो गया।
सब कुछ शांत हो गया।
सिया वापस normal हो गई।
उसने आरव की तरफ देखा।
“अब… मुझे जाना होगा…”
आरव चिल्लाया—
“नहीं! प्लीज़ मत जाओ!”
सिया मुस्कुराई।
“हमारी कहानी… अभी खत्म नहीं हुई…”
“असली सच्चाई… अभी बाकी है…”
और धीरे-धीरे…
उसका शरीर हवा में गायब होने लगा।
आरव चिल्लाता रह गया—
“सिया!”
लेकिन—
वो गायब हो चुकी थी।
अचानक—
आरव के phone पर एक आखिरी message आया।
Unknown Number से।
Message में लिखा था—
“अगर तुम सच जानना चाहते हो…”
“तो सिया की पुरानी diary ढूंढो…”
“उस diary में वो सच्चाई है…”
“जो सब कुछ बदल देगी…”
आरव ने phone को कसकर पकड़ा।
अब उसे समझ आ गया था—
ये कहानी…
अभी खत्म नहीं हुई थी।
असल mystery…
अभी शुरू हुई थी।
PART 5 END