PART 4: पुराना रेलवे स्टेशन
रात के 10:45 बजे।
पुराना रेलवे स्टेशन…
शहर के सबसे सुनसान और भुलाए गए जगहों में से एक।
टूटी हुई दीवारें…
जंग लगे हुए लोहे के खंभे…
और चारों तरफ फैली हुई डरावनी खामोशी।
आरव स्टेशन के बाहर खड़ा था।
उसका दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि उसे खुद उसकी आवाज़ सुनाई दे रही थी।
उसने अपने phone की screen देखी।
10:46 PM
उसे वही message याद आ रहा था—
“अगर तुम सिया को फिर से देखना चाहते हो… तो रात 11 बजे पुराने रेलवे स्टेशन पर आना।”
उसने गहरी साँस ली…
और धीरे-धीरे स्टेशन के अंदर कदम रखा।
अंदर पूरी तरह अंधेरा था।
सिर्फ एक flickering light जल रही थी, जो हर कुछ सेकंड में बुझ और जल रही थी।
आरव के कदमों की आवाज़ पूरे स्टेशन में गूंज रही थी।
“कोई है…?” उसने धीरे से आवाज़ लगाई।
कोई जवाब नहीं।
सिर्फ हवा की आवाज़।
और अचानक—
उसके phone पर notification आया।
Unknown Number से message।
“तुम आ गए…”
आरव का दिल रुक सा गया।
उसने तुरंत reply किया—
“कौन हो तुम? सिया कहाँ है?”
कुछ सेकंड बाद reply आया—
“पीछे मुड़कर देखो…”
आरव की साँसें तेज़ हो गईं।
उसने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा।
लेकिन—
वहाँ कोई नहीं था।
“ये… ये क्या मज़ाक है…” उसने डरते हुए कहा।
तभी—
उसे पीछे से कदमों की आवाज़ सुनाई दी।
टक… टक… टक…
आरव तुरंत पीछे मुड़ा।
इस बार—
वहाँ कोई खड़ा था।
एक लड़की।
सफेद dress में।
उसके बाल उसके चेहरे पर गिर रहे थे।
आरव की आँखें फैल गईं।
“सिया…?”
लड़की ने धीरे-धीरे अपना चेहरा ऊपर उठाया।
वो…
सिया थी।
वही चेहरा…
वही आँखें…
वही सिया…
आरव की आँखों में आँसू आ गए।
“सिया… तुम… तुम ज़िंदा हो…”
वो उसकी तरफ बढ़ा।
लेकिन—
सिया ने हाथ उठाकर उसे रोक दिया।
“रुको।”
उसकी आवाज़ ठंडी थी।
बिल्कुल अलग।
“मेरे पास मत आओ।”
आरव वहीं रुक गया।
“क्यों…? सिया… क्या हुआ है?”
सिया की आँखों में आँसू थे।
“तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था…”
“क्यों? क्या हो रहा है?”
सिया कुछ सेकंड तक चुप रही।
फिर उसने कहा—
“क्योंकि… अब बहुत देर हो चुकी है।”
अचानक—
स्टेशन की light पूरी तरह बंद हो गई।
चारों तरफ अंधेरा छा गया।
आरव का दिल जोर से धड़कने लगा।
“सिया…?”
कोई जवाब नहीं।
फिर—
light वापस जली।
और…
सिया गायब थी।
आरव shock में खड़ा रह गया।
“सिया!”
वो इधर-उधर देखने लगा।
“सिया! कहाँ हो तुम!”
कोई जवाब नहीं।
जैसे वो कभी वहाँ थी ही नहीं।
तभी—
पीछे से एक आदमी की आवाज़ आई—
“तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था।”
आरव ने तुरंत पीछे मुड़कर देखा।
वही आदमी…
जो उस photo में था।
अब उसका चेहरा साफ दिख रहा था।
उसकी आँखें ठंडी थीं।
और उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कान थी।
“तुम कौन हो?” आरव ने डरते हुए पूछा।
आदमी धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ा।
“मैं… वो हूँ… जिससे सिया भाग रही है।”
आरव का दिल जोर से धड़कने लगा।
“क्यों? तुम उससे क्या चाहते हो?”
आदमी हँस पड़ा।
“तुम नहीं समझोगे…”
“तो समझाओ!”
आदमी उसकी आँखों में देखते हुए बोला—
“सिया… अब इस दुनिया की नहीं है।”
आरव गुस्से में आ गया।
“चुप रहो! मैंने अभी उसे देखा!”
आदमी की मुस्कान और गहरी हो गई।
“हाँ… देखा तुमने…”
“लेकिन सवाल ये है…”
वो उसके करीब आया।
और धीरे से बोला—
“क्या वो सच में ज़िंदा है…?”
अचानक—
आरव के phone पर फिर से message आया।
Unknown Number से।
उसने trembling hands से message खोला।
Message में लिखा था—
“उस आदमी पर भरोसा मत करना…”
आरव ने तुरंत उस आदमी की तरफ देखा।
लेकिन—
वो आदमी भी गायब था।
जैसे वो कभी वहाँ था ही नहीं।
अब स्टेशन पर सिर्फ आरव था।
और उसकी तेज़ धड़कती हुई सांसें।
उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
क्या सिया सच में ज़िंदा थी?
या…
वो कुछ और थी?
तभी—
उसके पीछे से एक धीमी आवाज़ आई—
“आरव…”
उसकी सांस रुक गई।
वो धीरे-धीरे पीछे मुड़ा।
और जो उसने देखा—
उसे देखकर उसका खून जम गया।
PART 4 END