PART 3: अतीत का दरवाज़ा
रात के 2 बजे थे।
बारिश अभी भी हो रही थी।
आसमान में बिजली चमक रही थी, और हर चमक के साथ आरव का चेहरा कुछ सेकंड के लिए रोशन हो जाता।
उसका phone अभी भी उसके हाथ में था।
वही photo…
वही डरावनी photo…
जिसमें सिया थी… और उसके पीछे एक आदमी।
आरव की उंगलियाँ काँप रही थीं।
“ये कौन है…?” उसने खुद से कहा।
उसने फिर से सिया को call किया।
लेकिन—
Phone switched off.
उसके दिल में एक अजीब सा डर पैदा हो गया।
ऐसा डर… जो उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था।
अगले दिन—
आरव सीधे सिया के घर पहुँचा।
दरवाज़ा बंद था।
उसने doorbell बजाई।
कोई जवाब नहीं।
उसने फिर बजाई।
फिर भी कोई जवाब नहीं।
पास खड़ी एक बुज़ुर्ग औरत ने कहा—
“बेटा… तुम सिया को ढूंढ रहे हो?”
आरव ने तुरंत उनकी तरफ देखा।
“जी… आपको कैसे पता?”
औरत ने गहरी साँस ली।
“वो… कल रात ही चली गई।”
आरव का दिल जैसे रुक गया।
“चली गई? कहाँ?”
औरत ने सिर हिलाया।
“पता नहीं बेटा… वो बहुत जल्दी में थी। रो भी रही थी।”
आरव के कानों में सिर्फ एक शब्द गूंज रहा था—
चली गई…
बिना बताए।
बिना उससे मिले।
बिना कुछ कहे।
आरव वहीं सड़क पर खड़ा रह गया।
उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
कल तक सब ठीक था…
फिर अचानक ऐसा क्या हुआ?
तभी—
उसे कुछ याद आया।
सिया की वो बात—
“अगर एक दिन मैं अचानक गायब हो जाऊँ… तो तुम क्या करोगे?”
उसका दिल और तेज़ धड़कने लगा।
क्या सिया को पहले से पता था?
क्या वो जानती थी कि वो जाने वाली है?
आरव वापस अपने कमरे में आया।
उसने अपना laptop खोला।
और उस Unknown Number को trace करने की कोशिश करने लगा।
लेकिन—
कोई information नहीं मिली।
Number completely hidden था।
जैसे वो number exist ही नहीं करता।
तभी—
उसे याद आया।
वो photo।
उसने photo को zoom किया।
सिया का चेहरा साफ दिख रहा था।
लेकिन पीछे खड़ा आदमी…
उसका चेहरा shadow में था।
फिर अचानक—
आरव की नजर photo के एक corner पर गई।
वहाँ एक board दिख रहा था।
जिस पर कुछ लिखा था।
आरव ने photo को और zoom किया।
उसका दिल जोर से धड़कने लगा।
Board पर लिखा था—
“City Hospital”
आरव तुरंत खड़ा हो गया।
“Hospital…?”
वो तुरंत City Hospital पहुँचा।
Hospital का माहौल शांत था।
सफेद दीवारें…
अजीब सी smell…
और हर जगह खामोशी।
वो reception पर गया।
“Excuse me… क्या यहाँ सिया नाम की कोई लड़की admit है?”
Receptionist ने computer check किया।
कुछ सेकंड बाद—
उसने सिर हिलाया।
“नहीं।”
आरव निराश हो गया।
वो वापस जाने लगा।
तभी—
पीछे से एक आवाज आई।
“तुम… सिया को ढूंढ रहे हो?”
आरव ने पीछे मुड़कर देखा।
वहाँ एक nurse खड़ी थी।
उसकी आँखों में अजीब सा भाव था।
“जी… आप सिया को जानती हैं?”
Nurse कुछ सेकंड तक चुप रही।
फिर उसने धीरे से कहा—
“तुम्हें उसके बारे में नहीं पता… है ना?”
आरव confused हो गया।
“क्या मतलब?”
Nurse ने इधर-उधर देखा।
फिर धीरे से कहा—
“आओ… मेरे साथ।”
वो उसे hospital के एक पुराने corridor में ले गई।
वहाँ बहुत कम लोग थे।
उसने एक कमरे के सामने रुककर कहा—
“ये कमरा…”
आरव ने दरवाज़े पर लिखा नाम पढ़ा।
उसकी आँखें फैल गईं।
वहाँ लिखा था—
“SIA MEHRA”
आरव का दिल जोर से धड़कने लगा।
“ये… ये क्या है?”
Nurse ने धीरे से कहा—
“सिया यहाँ पहले admit थी।”
“कब?”
Nurse ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—
“तीन साल पहले।”
आरव shocked हो गया।
“तीन साल पहले? लेकिन… मैं तो उससे सिर्फ 6 महीने पहले मिला हूँ…”
Nurse की आँखों में sympathy थी।
“तुम नहीं जानते…”
“क्या?”
Nurse ने धीरे से कहा—
“तीन साल पहले… सिया की मौत हो गई थी।”
आरव के पैरों तले जमीन खिसक गई।
“न… नहीं…”
उसकी आवाज काँप रही थी।
“ये… ये झूठ है…”
Nurse ने file आगे बढ़ाई।
“ये उसकी file है।”
आरव ने काँपते हाथों से file खोली।
उसमें सिया की photo थी।
वही चेहरा…
वही आँखें…
नीचे लिखा था—
Status: DEAD
आरव की सांस रुक गई।
“ये… ये कैसे हो सकता है…?”
उसका दिमाग काम करना बंद कर चुका था।
अगर सिया मर चुकी थी…
तो वो पिछले 6 महीने से किसके साथ था?
किससे बात कर रहा था?
किससे प्यार कर रहा था?
तभी—
आरव के phone पर एक message आया।
Unknown Number से।
उसने trembling hands से message खोला।
Message में लिखा था—
“अब तुम्हें सच्चाई पता चल गई…”
आरव की आँखें फैल गईं।
फिर दूसरा message आया—
“लेकिन असली सच्चाई अभी बाकी है…”
और फिर—
तीसरा message—
“अगर तुम सिया को फिर से देखना चाहते हो… तो आज रात 11 बजे… पुराने रेलवे स्टेशन पर आना।”
आरव का दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि उसे लगा वो बेहोश हो जाएगा।
उसने phone को कसकर पकड़ा।
उसके दिमाग में सिर्फ एक सवाल था—
अगर सिया मर चुकी थी…
तो वो कौन थी… जिससे वो प्यार करता था?
उस रात…
सब कुछ बदलने वाला था।
PART 3 END