अधूरी मोहब्बत का आख़िरी ख़त

PART 2: सिया का डर

बारिश की बूंदें अभी भी गिर रही थीं।
कैफे के बाहर सड़क पर पीली light चमक रही थी, और उस light में सिया का चेहरा और भी रहस्यमयी लग रहा था।

आरव ने धीरे से पूछा,
“सिया… तुम ठीक हो ना?”

सिया कुछ सेकंड तक चुप रही।
उसकी आँखें आरव को देख रही थीं… लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे वो कहीं और खोई हुई हो।

“हाँ… मैं ठीक हूँ…” उसने हल्की मुस्कान के साथ कहा।

लेकिन आरव समझ गया था—
वो मुस्कान नकली थी।

क्योंकि उसकी आँखों में डर साफ दिख रहा था।


उस दिन के बाद, आरव और सिया रोज मिलने लगे।

कभी कॉलेज के बाद पार्क में,
कभी कैफे में,
कभी बिना किसी वजह के बस साथ बैठने के लिए।

उनकी बातें कभी खत्म नहीं होती थीं।

एक दिन, पार्क की बेंच पर बैठे हुए, सिया ने अचानक पूछा—

“आरव… अगर एक दिन मैं अचानक गायब हो जाऊँ… तो तुम क्या करोगे?”

आरव हँस पड़ा।

“ये कैसा सवाल है?”

“बस ऐसे ही… बताओ ना…”

आरव ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—

“मैं तुम्हें ढूंढूँगा।
पूरी दुनिया में ढूंढूँगा।
जब तक तुम मिल नहीं जाती…”

सिया की आँखें भर आईं।

उसने तुरंत नजरें नीचे कर लीं।

“और अगर मैं कभी मिली ही नहीं तो?”

आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“तो मैं इंतज़ार करूँगा।
आखिरी साँस तक।”

सिया ने उसकी तरफ देखा…

और पहली बार, उसके चेहरे पर सच्ची मुस्कान आई।

लेकिन उस मुस्कान के पीछे… एक दर्द भी था।


उस रात, सिया अपने कमरे में अकेली बैठी थी।

कमरे की light बंद थी।
सिर्फ खिड़की से आती चाँद की रोशनी थी।

उसने अपना phone उठाया… और एक message पढ़ा।

Unknown Number से message आया था:

“तुम्हें याद है ना… तुम भाग नहीं सकती।”

सिया के हाथ काँपने लगे।

उसने तुरंत phone बंद कर दिया।

उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।

“क्यों…?” उसने खुद से कहा।

“क्यों वापस आ गए तुम…?”


अगले दिन, कॉलेज में—

आरव ने notice किया कि सिया बहुत चुप थी।

वो पहले जैसी नहीं रही थी।

ना वो हँस रही थी,
ना वो मज़ाक कर रही थी।

“क्या हुआ?” आरव ने पूछा।

“कुछ नहीं…”

“सिया, मुझसे झूठ मत बोलो।”

सिया चुप रही।

फिर अचानक उसने कहा—

“आरव… तुम मुझसे वादा करो…”

“क्या?”

“चाहे कुछ भी हो जाए… तुम मुझसे नफरत नहीं करोगे।”

आरव confused हो गया।

“ऐसा क्यों कह रही हो?”

सिया ने जवाब नहीं दिया।

बस उसकी आँखों में देखा।

और कहा—

“बस वादा करो…”

आरव ने बिना कुछ सोचे कहा—

“मैं वादा करता हूँ।”

सिया की आँखों में आँसू आ गए।


उस दिन जब सिया घर जा रही थी, उसे लगा जैसे कोई उसका पीछा कर रहा है।

वो बार-बार पीछे मुड़कर देख रही थी।

लेकिन वहाँ कोई नहीं था।

फिर अचानक—

उसके phone पर फिर से वही Unknown Number से call आया।

सिया ने डरते हुए call receive किया।

दूसरी तरफ से सिर्फ एक आवाज आई—

“तुम्हारा समय खत्म हो रहा है…”

Call disconnect हो गया।

सिया वहीं सड़क पर खड़ी रह गई।

उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था।

उसे समझ आ गया था—

उसका अतीत… वापस आ चुका था।

और अब… वो उससे बच नहीं सकती थी।


उसी रात—

आरव अपने कमरे में बैठा था।

अचानक उसके phone पर एक unknown message आया।

Message में सिर्फ एक photo थी।

उस photo में—

सिया थी।

और उसके पीछे… एक आदमी खड़ा था।

उस आदमी का चेहरा साफ नहीं दिख रहा था।

लेकिन उसके हाथ में एक knife था।

आरव का दिल जोर से धड़कने लगा।

उसने तुरंत सिया को call किया।

लेकिन—

सिया का phone switched off था।


आरव ने खिड़की से बाहर देखा।

बारिश फिर से शुरू हो चुकी थी।

और उसे पहली बार महसूस हुआ—

कुछ बहुत गलत होने वाला है।

कुछ ऐसा…

जो उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल देगा।


PART 2 END

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top