PART 10 (FINAL): सबसे खतरनाक सच
बारिश हो रही थी।
ठंडी हवा पूरे रेलवे स्टेशन में गूंज रही थी।
आरव घुटनों के बल जमीन पर बैठा था।
उसकी आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे।
उसके सामने…
सिया खड़ी थी।
वही सिया…
जिससे उसने सबसे ज्यादा प्यार किया था।
और…
जिसे उसने अपने ही हाथों से खो दिया था।
“मैंने तुम्हें मार दिया…” आरव की आवाज़ टूट रही थी।
“मैं ही तुम्हारा killer हूँ…”
सिया चुपचाप उसे देख रही थी।
उसकी आँखों में ना गुस्सा था…
ना नफरत…
सिर्फ एक गहरा दर्द।
कुछ सेकंड बाद…
सिया धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ी।
और उसके सामने बैठ गई।
उसने अपना हाथ आरव के चेहरे के पास लाया।
लेकिन…
वो उसे छू नहीं सकी।
“तुम सच जान चुके हो, आरव…”
उसकी आवाज़ धीमी थी।
“लेकिन…”
वो रुक गई।
“ये पूरी सच्चाई नहीं है।”
आरव ने confused होकर उसकी तरफ देखा।
“क्या मतलब?”
सिया ने धीरे से कहा—
“तुम्हें याद है…”
“हम पहली बार कहाँ मिले थे?”
आरव ने सोचा।
“कॉलेज के बाहर…”
सिया ने सिर हिलाया।
“नहीं…”
उसकी आवाज़ और गहरी हो गई—
“हम पहली बार hospital में मिले थे।”
आरव shock में था।
“Hospital…?”
“लेकिन… मैं तो कभी—”
अचानक…
उसके दिमाग में तेज़ दर्द शुरू हुआ।
उसकी आँखों के सामने flashes आने लगे।
White walls…
Hospital bed…
Machines…
Beeping sound…
और फिर—
उसे सच याद आ गया।
तीन साल पहले…
रेलवे स्टेशन पर accident के बाद…
सिर्फ सिया नहीं मरी थी।
आरव भी मर गया था।
उसकी सांस रुक गई।
“न… नहीं…”
उसकी आँखों में डर साफ दिख रहा था।
सिया की आँखों से आँसू गिरने लगे।
“उस रात…”
“जब तुमने मेरा हाथ छोड़ा…”
“तुम guilt सह नहीं पाए…”
“तुम पटरी पर कूद गए…”
“और…”
उसकी आवाज़ टूट गई—
“तुम भी मर गए…”
आरव की पूरी दुनिया रुक गई।
“तो… मैं…?”
उसकी आवाज़ कांप रही थी।
“मैं… अभी क्या हूँ…?”
सिया ने धीरे से कहा—
“तुम भी मेरी तरह… एक अधूरी आत्मा हो…”
आरव पीछे हट गया।
“नहीं…”
“ये possible नहीं है…”
“मैं पिछले 6 महीने से जी रहा हूँ…”
“मैंने सब कुछ feel किया है…”
सिया की आँखों में दर्द था।
“नहीं, आरव…”
“तुम जी नहीं रहे थे…”
“तुम बस… सच से भाग रहे थे…”
अचानक—
उसके आसपास की दुनिया बदलने लगी।
उसका कमरा…
उसकी job…
उसके दोस्त…
सब कुछ धुंधला होने लगा।
जैसे वो कभी exist ही नहीं करता था।
“तो… ये सब क्या था…?”
आरव की आवाज़ टूट गई।
सिया ने धीरे से कहा—
“ये तुम्हारा illusion था…”
“तुम्हारी आत्मा ने एक fake दुनिया बना ली थी…”
“ताकि तुम अपने guilt से बच सको…”
आरव अब पूरी तरह टूट चुका था।
उसने धीरे से पूछा—
“और अब…?”
सिया की आँखों में आँसू थे।
“अब तुम्हें सच accept करना होगा…”
“तभी… तुम्हारी आत्मा मुक्त होगी…”
आरव ने उसकी आँखों में देखा।
“और अगर मैं सच accept नहीं कर पाया…?”
सिया की आवाज़ धीमी हो गई—
“तो तुम हमेशा यहीं फंसे रहोगे…”
“अकेले…”
कुछ सेकंड की खामोशी के बाद…
आरव ने धीरे से कहा—
“मैं थक गया हूँ, सिया…”
“मैं अब और नहीं भागना चाहता…”
उसकी आँखों से आखिरी आँसू गिरा।
“मैं तुम्हारे साथ आना चाहता हूँ…”
सिया की आँखों में पहली बार शांति दिखी।
उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया।
इस बार…
आरव उसका हाथ छू सका।
अचानक—
चारों तरफ तेज़ सफेद रोशनी फैल गई।
बारिश रुक गई।
दर्द खत्म हो गया।
डर खत्म हो गया।
धीरे-धीरे…
दोनों की आत्माएँ उस रोशनी में गायब होने लगीं।
जाने से पहले…
सिया ने आखिरी बार कहा—
“सच्चा प्यार कभी खत्म नहीं होता…”
“वो बस… दूसरी दुनिया में पूरा होता है…”
अगली सुबह—
पुराने रेलवे स्टेशन पर…
एक बुज़ुर्ग आदमी खड़ा था।
उसने पटरी के पास दो shadows देखीं।
जो धीरे-धीरे…
हवा में गायब हो गईं।
उस दिन के बाद…
किसी ने कभी आरव या सिया को नहीं देखा।
लेकिन…
कुछ लोग कहते हैं…
आज भी…
बारिश की रातों में…
पुराने रेलवे स्टेशन पर…
दो परछाइयाँ साथ खड़ी दिखाई देती हैं।
एक लड़का…
और एक लड़की…
जो इस दुनिया में नहीं हैं…
लेकिन…
एक-दूसरे के साथ हमेशा हैं।