अधूरी मोहब्बत का आख़िरी ख़त

3200153

PART – 1

प्रस्तावना: एक आख़िरी इंतज़ार

रात के ठीक 11:47 बज रहे थे।

रेलवे स्टेशन पर खड़ा आरव बार-बार अपनी घड़ी देख रहा था। प्लेटफॉर्म लगभग खाली था। ठंडी हवा चल रही थी, और दूर कहीं एक कुत्ते के भौंकने की आवाज़ सुनाई दे रही थी।

उसके हाथ में एक पुराना, मुड़ा-तुड़ा ख़त था…

वही ख़त… जो उसे 5 साल पहले मिला था।

उसने धीरे से उसे खोला। शब्द आज भी उतने ही ताज़ा थे—

“अगर तुम मुझसे सच्चा प्यार करते हो… तो 5 साल बाद, इसी स्टेशन पर मेरा इंतज़ार करना। अगर मैं आई… तो हम हमेशा साथ रहेंगे। अगर नहीं आई… तो समझ लेना मेरी मोहब्बत अधूरी रह गई…”

आरव की आँखों में नमी उतर आई।

“क्या वो आएगी…?” उसने खुद से पूछा।

और तभी…

दूर से ट्रेन की सीटी सुनाई दी।

लेकिन इस कहानी की शुरुआत यहां से नहीं हुई थी।

इसकी शुरुआत 7 साल पहले हुई थी…

अध्याय 1: पहली नज़र

7 साल पहले…

रायपुर का एक साधारण कॉलेज।

आरव, एक शांत, साधारण लड़का था। ज्यादा दोस्त नहीं थे। हमेशा अपने में रहता था।

उस दिन भी वो लाइब्रेरी के बाहर बैठा था।

तभी उसने उसे पहली बार देखा।

सफेद सलवार सूट में… खुले बाल… और आंखों में एक अजीब सी उदासी।

वो लड़की अकेले बैठी थी।

उसका नाम था — सिया।

वो किसी से बात नहीं करती थी। हमेशा चुप रहती थी।

आरव ने उसे कई दिनों तक बस दूर से देखा।

लेकिन उस दिन…

बारिश हो रही थी।

सभी भाग रहे थे।

सिया छत के नीचे खड़ी थी… लेकिन वो भीग रही थी।

आरव ने हिम्मत की।

वो उसके पास गया।

“तुम… छाता क्यों नहीं लाई?” उसने पूछा।

सिया ने उसकी तरफ देखा।

उसकी आंखें बेहद गहरी थीं।

“मुझे बारिश पसंद है…” उसने धीरे से कहा।

और उस एक जवाब ने…

आरव की पूरी दुनिया बदल दी।


अगले दिन…

आरव फिर उसी जगह गया।

और सिया भी वहीं थी।

इस बार उसने खुद पूछा—

“तुम हमेशा अकेले क्यों रहते हो?”

आरव थोड़ा मुस्कुराया।

“शायद… क्योंकि कोई मेरा इंतज़ार नहीं करता।”

सिया कुछ सेकंड तक उसे देखती रही।

फिर पहली बार…

वो मुस्कुराई।

और उस मुस्कान में…

आरव खो गया।

उस दिन से…

दोनों रोज मिलने लगे।

कभी कैंटीन में…

कभी लाइब्रेरी में…

कभी बस चुपचाप बैठकर।

कभी-कभी दोनों बिना कुछ बोले घंटों बैठे रहते।

लेकिन फिर भी…

सब कुछ कह देते।


एक दिन…

सिया ने पूछा—

“अगर कोई अचानक तुम्हारी ज़िंदगी से चला जाए… तो तुम क्या करोगे?”

आरव ने बिना सोचे कहा—

“मैं उसका इंतज़ार करूंगा।”

सिया की आंखें भर आईं।

“हर कोई इंतज़ार नहीं करता…”

आरव ने पूछा—

“तुम ऐसा क्यों कह रही हो?”

सिया चुप रही।

और यही वो दिन था…

जब आरव को पहली बार महसूस हुआ…

कि सिया कुछ छुपा रही है।

कोई बड़ा राज़।

कोई ऐसा सच…

जो सब कुछ बदल सकता था।


उस रात…

सिया ने आरव को झील के पास बुलाया।

हवा ठंडी थी।

चांद पूरा था।

सिया रो रही थी।

“आरव… अगर मैं एक दिन चली जाऊं… तो क्या तुम मुझे भूल जाओगे?”

आरव का दिल तेज़ धड़कने लगा।

“मैं तुम्हें कभी नहीं भूल सकता…”

सिया ने उसे देखा।

और धीरे से कहा—

“तो मुझसे वादा करो…”

“तुम मेरा इंतज़ार करोगे… चाहे कितना भी समय लगे…”

आरव ने बिना सोचे कहा—

“मैं पूरी ज़िंदगी इंतज़ार करूंगा…”

सिया रो पड़ी।

और उसी रात…

दोनों को एहसास हुआ…

कि वो एक-दूसरे से प्यार करते हैं।

लेकिन…

उन्हें नहीं पता था…

कि उनकी मोहब्बत की सबसे बड़ी परीक्षा अभी बाकी थी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top