Part 3 (Final): अधूरी मुलाकात
कमरे में अंधेरा था।
सिर्फ खिड़की से आती हल्की चांदनी।
और…
अनाया।
वह कबीर के सामने खड़ी थी।
वैसी ही…
जैसी 2 साल पहले थी।
लेकिन…
उसकी आंखों में अब एक अजीब सी शांति थी।
जैसे…
वह अब इस दुनिया का हिस्सा नहीं थी।
कबीर की आवाज कांप रही थी—
“त… तुम मर चुकी थी…”
अनाया की आंखों में आंसू आ गए।
उसने धीरे से कहा—
“हाँ…”
“मैं मर चुकी हूँ।”
कबीर का दिल टूट गया।
उसकी आंखों से आंसू बहने लगे।
“तो फिर… तुम यहां कैसे हो?”
अनाया ने धीरे-धीरे उसके पास कदम बढ़ाए।
लेकिन…
उसके कदमों की कोई आवाज नहीं थी।
“क्योंकि… मेरा एक वादा अधूरा था।”
कबीर ने कांपती आवाज में पूछा—
“कौन सा वादा?”
अनाया मुस्कुराई।
वही पुरानी मुस्कान।
“मैंने तुमसे कहा था…”
‘मैं हमेशा तुम्हारे पास रहूंगी।’
कबीर रोने लगा।
“तुमने मुझे क्यों नहीं बताया… कि तुम्हें cancer था?”
अनाया ने धीरे से कहा—
“क्योंकि… मैं तुम्हें दर्द में नहीं देख सकती थी।”
“मैं चाहती थी… कि तुम मुझे मुस्कुराते हुए याद करो…”
“ना कि एक कमजोर लड़की के रूप में…”
कमरे में खामोशी छा गई।
सिर्फ दोनों की सांसों की आवाज।
और…
दिल टूटने की आवाज।
अनाया ने कहा—
“मेरे पास ज्यादा समय नहीं है…”
कबीर घबरा गया—
“नहीं… तुम कहीं नहीं जाओगी…”
अनाया की आंखों से आंसू गिर गए।
“मुझे जाना होगा…”
“मैं सिर्फ तुमसे अलविदा कहने आई थी।”
कबीर ने उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की।
लेकिन…
उसका हाथ…
हवा में चला गया।
जैसे…
वह वहां थी ही नहीं।
कबीर टूट गया।
“प्लीज़… मुझे छोड़कर मत जाओ…”
अनाया ने आखिरी बार उसे देखा।
“तुम्हें जीना होगा…”
“मेरे लिए नहीं…”
“अपने लिए।”
अचानक…
उसका शरीर धीरे-धीरे fade होने लगा।
जैसे…
वह हवा में घुल रही हो।
कबीर चिल्लाया—
“अनाया!!!”
लेकिन…
वह गायब हो चुकी थी।
हमेशा के लिए।
कबीर जमीन पर बैठ गया।
उसकी आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे।
लेकिन…
तभी…
उसे अपने कंधे पर एक हल्का सा स्पर्श महसूस हुआ।
जैसे…
कोई अब भी उसके साथ हो।
उसने धीरे से आंखें बंद की।
और पहली बार…
2 साल बाद…
उसे सुकून महसूस हुआ।
क्योंकि…
वह जानता था—
प्यार कभी खत्म नहीं होता।
लोग चले जाते हैं…
लेकिन…
उनकी मोहब्बत हमेशा जिंदा रहती है।