आखिरी चिट्ठी – एक अधूरी मोहब्बत | Heart Touching Love Story in Hindi

PART – 1

बारिश हमेशा से कबीर को पसंद थी।

उसे लगता था कि बारिश में हर चीज़ साफ हो जाती है…
सड़कें, हवा… और कभी-कभी दिल भी।

लेकिन उस रात…

बारिश कुछ साफ नहीं कर रही थी।

बल्कि…

उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा राज उसके सामने लाने वाली थी।


कबीर अपने कमरे की खिड़की के पास बैठा था।

रात के 11 बजे थे।

फोन अचानक बजा।

Unknown Number.

उसने कुछ सेकंड सोचा… फिर कॉल उठा लिया।

“हेलो?”

दूसरी तरफ कुछ सेकंड खामोशी रही।

फिर…

एक लड़की की धीमी आवाज आई—

“क्या तुम अभी भी मेरा इंतज़ार कर रहे हो?”

कबीर का दिल अचानक तेज धड़कने लगा।

यह आवाज…

वह कभी भूल नहीं सकता था।

“अ… अनाया?”

उसकी आवाज कांप गई।

लेकिन…

कॉल कट चुका था।


अनाया।

वह लड़की…

जो 2 साल पहले उसकी जिंदगी से अचानक गायब हो गई थी।

बिना कुछ बताए।

बिना कोई reason दिए।

बस…

गायब।


कबीर और अनाया की मुलाकात एक लाइब्रेरी में हुई थी।

वह एक कोने में बैठी थी।

एक पुरानी किताब पढ़ रही थी।

उसके बाल उसके चेहरे पर गिर रहे थे।

और वह बार-बार उन्हें हटाने की कोशिश कर रही थी।

कबीर उसे देखता रह गया।

पता नहीं क्यों…

लेकिन उस दिन…

उसे लगा कि उसकी जिंदगी बदलने वाली है।


धीरे-धीरे…

दोनों बात करने लगे।

फिर दोस्त बने।

फिर…

प्यार।

लेकिन…

अनाया हमेशा एक बात कहती थी—

“अगर मैं कभी अचानक चली जाऊं… तो मेरा इंतज़ार करना।”

कबीर हंस देता था।

उसे लगता था यह मजाक है।

लेकिन…

एक दिन…

वह सच में चली गई।


कोई goodbye नहीं।

कोई message नहीं।

कोई explanation नहीं।

बस…

खालीपन।


कबीर ने उसे हर जगह ढूंढा।

उसके घर गया।

लेकिन…

वहां ताला लगा था।

पड़ोसियों ने बताया—

“वह यहां से चली गई।”

“कहां?”

“पता नहीं।”


और आज…

2 साल बाद…

उसका कॉल आया था।


कबीर का दिल जोर से धड़क रहा था।

तभी…

फोन पर एक message आया।

Unknown Number से।

“अगर सच जानना चाहते हो… तो कल रात 11 बजे, रेलवे स्टेशन पर आना।”


अगली रात।

कबीर रेलवे स्टेशन पर खड़ा था।

बारिश हो रही थी।

ठंडी हवा चल रही थी।

पूरा प्लेटफॉर्म लगभग खाली था।

घड़ी में 11 बजे।

लेकिन…

अनाया नहीं आई।


11:10

11:20

11:30

कबीर का दिल टूटने लगा।

शायद…

यह सब एक मजाक था।

वह जाने के लिए मुड़ा।

तभी…

पीछे से एक आवाज आई—

“तुम अभी भी मेरा इंतज़ार कर रहे हो…”

कबीर जम गया।

धीरे-धीरे पीछे मुड़ा।

और…

वहां…

अनाया खड़ी थी।

लेकिन…

कुछ अलग था।

उसकी आंखों में पहले जैसी चमक नहीं थी।

जैसे…

वह बहुत कुछ झेल चुकी हो।


कबीर उसके पास गया।

“तुम कहां चली गई थी?”

अनाया चुप रही।

फिर…

उसने एक चिट्ठी कबीर के हाथ में दी।

और कहा—

“सच इसमें है…”


कबीर ने कांपते हाथों से चिट्ठी खोली।

उसमें लिखा था—

“कबीर,
अगर तुम यह पढ़ रहे हो… तो शायद मैं अब तुम्हारी जिंदगी में नहीं हूँ।
मैंने तुमसे दूर जाने का फैसला इसलिए लिया… क्योंकि…

कबीर की सांस रुक गई।

वह आगे पढ़ने ही वाला था कि…

अचानक…

उसने ऊपर देखा।

अनाया…

वहां नहीं थी।

वह…

गायब हो चुकी थी।

जैसे…

वह कभी थी ही नहीं।


लेकिन…

सबसे डरावनी बात अभी बाकी थी।

चिट्ठी के आखिरी लाइन में लिखा था—

“मैं तुमसे उस दिन मिली थी… जिस दिन मेरी मौत हुई थी…”


कबीर के हाथ से चिट्ठी गिर गई।

उसका दिल जोर से धड़क रहा था।

अगर…

अनाया मर चुकी थी…

तो…

अभी उससे मिलने कौन आया था?

(TO BE CONTINUED…)

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